डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है? पहचानें, बचें और शिकायत कैसे करें (2026)

डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है? पहचानें, बचें और शिकायत कैसे करें (2026)

अचानक वीडियो कॉल आता है, सामने वर्दी में “पुलिस अफ़सर” बैठा है और कहता है कि आपके नाम का पार्सल ड्रग्स के साथ पकड़ा गया है, आप “डिजिटल अरेस्ट” में हैं। डर के मारे लोग घंटों कैमरे के सामने बैठे रहते हैं और लाखों रुपये भेज देते हैं। यह डिजिटल अरेस्ट स्कैम (Digital Arrest Scam) है – और यह पूरी तरह धोखा है।

सबसे ज़रूरी बात: भारत के कानून में “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई चीज़ नहीं है। गृह मंत्रालय के I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) ने साफ़ कहा है कि CBI, पुलिस, कस्टम, ED या जज वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ़्तार नहीं करते।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम कैसे होता है?

ठग लगभग हर बार एक जैसी कहानी चलाते हैं:

  1. पहला कॉल या मैसेज: कूरियर कंपनी, TRAI, बैंक या टेलीकॉम विभाग के नाम से कॉल आता है – “आपका नंबर बंद होने वाला है” या “आपके नाम का पार्सल पकड़ा गया है।”
  2. “पुलिस” को कॉल ट्रांसफ़र: फिर कॉल किसी नकली “पुलिस अफ़सर” या “CBI अधिकारी” को ट्रांसफ़र किया जाता है।
  3. वीडियो कॉल और नकली थाना: Skype या WhatsApp वीडियो कॉल पर वर्दी, थाने जैसा बैकग्राउंड और नकली ID कार्ड दिखाया जाता है।
  4. डर पैदा करना: कहा जाता है कि आपका आधार ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग या किसी बड़े केस में इस्तेमाल हुआ है। कभी परिवार के किसी सदस्य के फँसने की बात भी कही जाती है।
  5. “किसी को मत बताना”: आपसे कैमरा चालू रखने, कमरे से बाहर न जाने और परिवार को कुछ न बताने को कहा जाता है।
  6. पैसे की माँग: आख़िर में “जाँच के लिए”, “ज़मानत” या “खाता वेरिफ़ाई करने” के नाम पर पैसा किसी “सरकारी खाते” में भेजने को कहा जाता है।

7 पहचान: ये दिखे तो समझिए स्कैम है

ठग क्या कहता/करता है सच क्या है
“आप डिजिटल अरेस्ट में हैं” कानून में ऐसी कोई गिरफ़्तारी नहीं होती
वीडियो कॉल पर पूछताछ असली पुलिस लिखित नोटिस देती है या थाने बुलाती है
“कैमरा बंद मत करना, कमरे से मत निकलना” कोई सरकारी एजेंसी ऐसा नहीं करवाती
“किसी को मत बताना, केस गोपनीय है” आपको अलग-थलग करना ठगी की चाल है
पैसा “वेरिफ़िकेशन” के लिए भेजो, बाद में लौटा देंगे कोई एजेंसी फ़ोन पर पैसा नहीं माँगती
WhatsApp पर “अरेस्ट वारंट” या “RBI लेटर” की फ़ोटो असली दस्तावेज़ ऐसे नहीं भेजे जाते
बहुत जल्दबाज़ी – “अभी नहीं किया तो जेल” डर और जल्दबाज़ी ही ठगों का हथियार है

ऐसा कॉल आए तो क्या करें?

  1. घबराएं नहीं, कॉल काट दें। आपको किसी की बात सुनने की कानूनी मजबूरी नहीं है।
  2. कोई पैसा न भेजें, कोई OTP, आधार, बैंक या UPI जानकारी न बताएं।
  3. परिवार को तुरंत बताएं। ठग यही चाहते हैं कि आप अकेले रहें।
  4. ख़ुद जाँचें: अगर सच में किसी केस की बात है, तो अपने नज़दीकी थाने में ख़ुद जाकर या उनके आधिकारिक नंबर पर पूछें – कॉल करने वाले के दिए नंबर पर नहीं।
  5. रिपोर्ट करें: संदिग्ध कॉल/मैसेज की जानकारी संचार साथी पोर्टल के “चक्षु” सेक्शन में दे सकते हैं।

पैसा चला गया हो तो तुरंत ये करें

जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसा रुकने की संभावना उतनी ज़्यादा होगी:

  1. 1930 पर तुरंत कॉल करें (राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन)।
  2. cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें और शिकायत नंबर संभालकर रखें।
  3. अपने बैंक के कस्टमर केयर (बैंक की वेबसाइट या पासबुक पर दिया नंबर) पर कॉल करके ट्रांज़ैक्शन की जानकारी दें।
  4. सबूत संभालें: कॉल का नंबर, स्क्रीनशॉट, वीडियो कॉल की ID, ट्रांज़ैक्शन ID।

पूरा तरीका कदम-दर-कदम यहाँ पढ़ें: UPI Fraud Complaint कैसे करें? पैसा वापस पाने के 7 कदम

बुज़ुर्गों और परिवार को कैसे बचाएं?

  • घर के बुज़ुर्गों को साफ़ बताएं: “पुलिस कभी वीडियो कॉल पर गिरफ़्तार नहीं करती।” यह एक लाइन बहुत बड़ा बचाव है।
  • उन्हें सिखाएं कि अनजान वीडियो कॉल न उठाएं, और डराने वाला कॉल आए तो पहले आपको फ़ोन करें।
  • फ़ोन में परिवार के 2–3 लोगों के नंबर “Emergency” नाम से सेव करें।
  • यह लेख फ़ैमिली WhatsApp ग्रुप में शेयर करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

क्या पुलिस वीडियो कॉल पर बयान ले सकती है?

गिरफ़्तारी वीडियो कॉल पर नहीं होती। किसी जाँच में बुलाना हो तो पुलिस लिखित नोटिस देती है। शक हो तो अपने थाने में ख़ुद जाकर पूछें।

ठगों के पास मेरा नाम और आधार नंबर कैसे आया?

डेटा लीक, फ़र्ज़ी ऐप या पुराने फ़ॉर्म से जानकारी उनके पास पहुँच सकती है। सिर्फ़ आपकी जानकारी बता देने से वे असली अफ़सर नहीं बन जाते।

मैंने डर से कुछ जानकारी बता दी, अब क्या करूँ?

तुरंत बैंक को बताकर UPI/नेट बैंकिंग का पासवर्ड और PIN बदलें, ज़रूरत हो तो खाता अस्थायी रूप से ब्लॉक करवाएं, और 1930 पर जानकारी दें।

क्या शिकायत करने के पैसे लगते हैं?

नहीं। 1930 और cybercrime.gov.in पर शिकायत मुफ़्त है। कोई “रिकवरी एजेंट” पैसे लेकर पैसा वापस दिलाने का दावा करे तो वह भी ठगी हो सकती है।

निष्कर्ष

डिजिटल अरेस्ट स्कैम सिर्फ़ डर पर चलता है। याद रखिए: कोई असली एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ़्तार नहीं करती और फ़ोन पर पैसा नहीं माँगती। कॉल काटिए, परिवार को बताइए और ज़रूरत हो तो 1930 पर शिकायत कीजिए।

नोट: यह लेख सिर्फ़ जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। स्रोत: I4C (गृह मंत्रालय) की नागरिक सलाह, जैसा The Tribune ने बताया; cybercrime.gov.in। जानकारी 28 अक्टूबर 2026 तक की है।

सुबोध कुमार

लेखक: सुबोध कुमार

कंप्यूटर, AI, मोबाइल और ऑनलाइन सुरक्षा पर आसान हिंदी में लिखते हैं। रोज़ के काम आने वाली बातें, जाँची-परखी जानकारी के साथ। मेरे बारे में · मुफ़्त टूल · Facebook

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